• By EYE Q India
  • June 16, 2023
Cataract treatment, Cataract / मोतियाबिंद, Eye care tips

Eye Care Tips: मोतियाबिंद की परेशानी से बचने के लिए आपको आंखों की खास देखभाल करनी चाहिए। तो कौन सी जरूरी सावधानियां बरतकर आप रख सकते हैं अपनी आंखों को इस खतरनाक बीमारी से दूर। आइए जान लेते हैं इस बारे में।

नई दिल्ली ,लाइफस्टाइल डेस्क Eye Care Tips अपनी आंखों के सही देखभाल करने से आप बढ़ती उम्र में होने वाली कई सारी समस्याओं में से एक मोतियाबिंद के लक्षणों को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है। मोतियाबिंद बादल वाले एरिया होते हैं जो आपकी आंख के लेंस के ऊपर बनते हैं। आपका लेंस आपकी आंख के सामने साफ, घुमावदार संरचना है जो आपको अलग-अलग दूरियों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है। तो मोतियाबिंद की परेशानी से बचने के लिए आपको उठाने होंगे ये जरूरी कदम।

 

मोतियाबिंद से बचने के जरूरी उपाय

1. अपनी आंखों को धूप से बचाएं

सूरज की अल्ट्रावायलेट ( यूवी ) किरणें आपकी आंखों को नुकसान पहुंचा सकती है , जिससे मोतियाबिंद की प्रॉब्लम बीमारी हो सकती है। यूवी रेज़ ऑक्सीडेटिव डैमेज की वजह बनती हैं। जब ऐसा होता है, तो हानिकारक अणु जिन्हें फ्री रैडिकल कहा जाता है , आपके लेंस में प्रोटीन को बाधित कर सकते हैं और उन्हें आपस में जोड़ सकते हैं। तो इसका उपाय यह है कि जब आप धूप में बाहर हों तो धूप का चश्मा और टोपी पहनें। ज्यादा सुरक्षा के लिए, ऐसे चश्मे पहनें जो यूवीए और यूवीबी किरणों से 100% सुरक्षा प्रदान करते हों।

2. संतुलित आहार लें

फलों और सब्जियों की ज्यादा से ज्यादा मात्रा लें और प्रोसेस्ड फूड्स का कम से कम सेवन करें। जो सिर्फ आंखों के लिए ही नहीं ओवरऑल हेल्थ के लिए अच्छा होता है। मोतियाबिंद को रोकने के लिए संतुलित आहार लेना सबसे असरदार उपाय है। एंटीऑक्सीडेंट की खुराक सबसे ज्यादा फायदेमंद होती है।

3. अपनी आंखों को चोट से बचाएं

मोतियाबिंद होने की वजहों में आंखों की चोट भी शामिल है। खेल , स्वीमिंग या अन्य एक्टिविटीज के दौरान भी चश्मे पहनें इससे भी आंखों में चोट लगने की संभावनाओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

4. आंखों की नियमित जांच कराएं

आंखों को सही-सलामत बनाए रखने के लिए नियमित तौर से उनकी जांच करवाते रहना चाहिए खासकर जब आप बूढ़े हो रहे होते हैं। इससे अगर मोतियाबिंद या कोई और आंखों से जुड़ी समस्या है तो इसका समय रहते पता चल जाता है जिससे समय पर इलाज शुरू किया जा सकता है और उसके गंभीर होने की स्थिति या अंधापन  को रोका जा सकता है।