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जानिए रेटिना ट्रीटमेंट के बारे में!

मानव के शरीर के सबसे एहम हिस्सा आँख होती है, जिसमें सबसे नाज़ुक रेटिना होता है। रेटिना की मदद से हम लोग सामने होने वाली हलचल को देख और समझ पते हैं। बदलते लाइफस्टाइल और हमारी नज़रान्दाज़ करने की आदत के कारण हमारी आँखों में होने वाली समस्या बढ़ती नज़र आ रही है। उन्ही समस्याओं में से एक है रेटिना से जुड़ी समस्या है।

रेटिना क्या है? (What is Retina in hindi)

आँख के पिछले पर्दे को रेटिना कहा जाता है। इसमें कुछ कोशिकाएं मौजूद होती हैं,  जिनकी मदद से प्रकाश पहुंचता है और उसी प्रकाश के कारण हम देखने में सक्षम होते हैं। आँख की ज्यादातर बीमारी रेटिना में किसी भी तरह की खराबी की वजह से होती हैं। रेटिना में किसी भी तरह की समस्या होने से प्रकाश की क्षमता कम हो जाती है। रेटिना आँख का सबसे नाज़ुक हिस्सा होता है और इसमें ज्यादातर सूजन की शिकायत हो सकती है, जिसे मेडिकल भाषा में मैक्युलर कहते हैं।

मैक्युलर क्या है? (What is macular in hindi)

मैक्युला रेटिना का वह हिस्सा होता है जो हमें दूर देखने में मदद करता है। यदि किसी कारण इस हिस्से में तरल पदार्थ जमा हो जाए या सूजन आ जाए तो दृष्टि को हानि पहुँचती है। किसी भी प्रकार के आँखों की समस्या के साथ-साथ आँखों की रोशनी जाने का ख़तरा हो सकता है।

मैक्युलर के लक्षण (Symptoms of macular)

मैक्युलर के लक्षण आम रूप से दिखाई नहीं देता हैं लेकिन आंखों में दर्द होता है। जब सूजन बढ़ने लगती है और रक्त नलिकाओं में ब्लॉकेज आने लगती है, तब देखने में दिक्कत आती है और चीजें धुंधली दिखाई देती हैं। इन सबके के सिवा अन्य लक्षण कुछ इस प्रकार हैं-

  • आंखों के सामने अंधेरा छा जाना।
  • चीजें हिलती हुई दिखना।
  • पढ़ने में मुश्किल होना।
  • रंगों को पहचने में दिक्कत या रंग न दिखाई देना।
  • रेखाएं टेढ़ी दिखाई देना।
  • तेज रोशनी से संवेदनशील हो जाना।

यह समस्या एक आंख में होती है और इसका पता गंभीर होने पर ही पता लग पाता है। वैसे यदि किसी को यह समस्या होती है, तो दूसरी आँख में होने की आशंका 50 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।

मैक्युलर के कारण (Causes of macular in hindi)

मैक्युलर की समस्या होने के अलग-अलग कारण हो सकते हैं लेकिन सबसे ज्यादा डायबिटीज के रोगियों और बढ़ती उम्र के लोगों को इसका शिकार होना पड़ता है। इस समस्या से कई बार उन लोगों को भी खतरा हो सकता है, जिनके परिवार में किसी को आंखों के रोगों की समस्या रही हो। इसके सिवा कुछ अन्य कारण यह हो सकते हैं-

  • रक्त वाहिनियों से जुड़ी समस्या
  • किसी दवाई का साइड इफेक्ट
  • जेनेटिक
  • आंख में ट्यूमर होना
  • मैक्युला में छेद होना
  • रेडिएशन के कारण
  • आंख में चोट लग जाना
  • मोतियाबिंद, ग्लुकोमा या रेटिना संबंधी मामलों में हुई किसी भी तरह की सर्जरी के कारण इस समस्या का होना, आदि।

रेटिना ट्रीटमेंट (Retina Treatment in Hindi)

यदि किसी को यह समस्या हो जाए तो सही समय पर उपचार करवाया जा सकता है, जिससे भविष्य में होने वाली तकलीफ से बचा जा सकता है। इसमें मैक्युला और उसके आसपास असामान्य रक्त वाहिकाओं को ठीक किया जाता है। मैक्युलर के उपचार में दवाएं, लेजर और सर्जरी की जाती है।

इस समस्या के उपचार के लिए सबसे प्रचलित इंट्राविट्रियल इंजेक्शन (आईवीआई) है। यदि मैक्युलर एक ही जगह हो तो फोकल लेजर किया जाता है।

फोकल लेजर ट्रीटमेंट-

इस प्रक्रिया में मैक्युला की सूजन कम करने का प्रयास किया जाता है। लेजर सर्जरी में रक्त नलिकाओं को सील करने का प्रयास किया जाता है। अधिकतर मामलों में फोकल लेजर ट्रीटमेंट से आँखों की रोशनी में सुधार आ जाता है।

सर्जरी-

मैक्युलर के लिए की जाने वाली सर्जरी को विटरेक्टोमी कहा जाता है। इस प्रक्रिया में मैक्युला पर जमे हुए फ्लूइड को निकाल लिया जाता है।

आईवीआई-

आईवीआई प्रक्रिया टॉपिकल एनेस्थीसिया की मदद से किया जाता है। आईवीआई को प्रशिक्षित रेटिना विशेषज्ञ द्वारा ही कराना चाहिए, जो उपचार को प्रभावी तरीके से कर सके और किसी भी तरह की संभावित जटिलताओं को समझ उपचार कर सकें। अगर मैक्युलर का कारण ग्लुकोमा या मोतियाबिंद है तो इनका उपचार कराना जरूरी हो जाता है।

आई क्यू विज़न अस्पताल-

आई क्यू विज़न अस्पताल में 15 तरह की आँखों की जांच की जाती है, जिसमें आँखों की देखभाल के उच्चतम स्तर की गुणवत्ता और तकनीक शामिल है। आई क्यू विज़न के 37 सुपर स्पेशियलिटी आँख के अस्पताल 28 शहरों में मौजूद है जिनमें उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, उत्तराखंड, गुजरात और महाराष्ट्र आदि शामिल हैं। अपॉइंटमेंट बुक करने के लिए- 1800-102-2016 पर संपर्क करें।

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आँखों का भेंगापन का इलाज मुमकिन है?

आँखों के रोशनी जितना ही ज़रूरी उसका साफ़ देख पाना भी होता है। उसी तरह कई लोगों की आँखों में बचपन से ही भेंगापन होता है या किसी कारण उन्हें इस समस्या से जुजना पड़ता है। जिस कारण उन्हें कई बार लोगों से बातचीत करने में झिझक होती है। लेकिन इस समस्या से किसको भी संकोच नहीं होना चाहिए क्योंकि इस का इलाज संभव है।

आँखों का भेंगापन क्या है? (What is Squint in Hindi)

आम भाषा में कहे तो आँखों का तिरछापन और अंग्रेजी में इसे सिक्विंट कहते हैं। यदि समय रहते इसका इलाज ना करवाया जाए, तो भविष्य में कई दिक्कतों का समाना करना पड़ सकता है। यह समस्या किसी भी व्यक्ति को कभी भी हो सकती है। अगर सही समय पर इस बीमारी का पता चल जाए तो इलाज आसनी हो जाता है।

आँखों के भेंगापन के कारण (Causes of Squint in Hindi)

  • मधुमेह
  • आँखों में किसी तरह की चोट लग जाना
  • किसी बीमारी के कारण आँखों को नुक्सान पहुंचना
  • थाइरोइड की समस्या
  • मोतियाबिंद
  • दिमागी चोट के कारण
  • किसी आघात स्ट्रोक के कारण
  • ग्रेव्स की बीमारी

आँखों के भेंगापन के लक्षण (Symptoms of Squint in Hindi)

  • भेन्गेपन के लक्षण पूरे समय भी रह सकते हैं और आते-जाते भी हो सकते हैं।
  • देखने में मुश्किल होना।
  • ऑंखें क्रॉस दिशा में दिखना।
  • तिरछी आँखें होना।
  • दोहरी दृष्टि होना।
  • आँखों का एक साथ न घूम पाना।
  • आंखे जो एक दिशा की और अपना लक्ष्य तय न कर पायें।
  • दृष्टि की या गहराई के अनुमान लगाने में हानि।

आँखों के भेंगापन के लिए परीक्षण (Diagnosis of Squint in Hindi)

इस परीक्षण में डॉक्टर आँखों की पूरी जाँच करने के लिए कुछ टेस्ट करते हैं, जो इस प्रकार है।

  • रेटिना की जाँच
  • कॉर्नियल लाइट रिफ्लेक्स की जाँच
  • कवर और अनकवर परीक्षण
  • मस्तिष्क और न्यूरोलॉजिकल जाँच
  • द्रश्य तीक्ष्णता की जाँच (visual acuity)

आँखों के भेंगापन का उपचार (Squint Treatment in Hindi)

आँखों के भेंगापन का उपचार उसके कारण के अनुसार ही किया जाता है। उपचार के तौर पर चश्मे, थेरेपी व सर्जरी का सहरा लिया जाता है।

चश्मा- यदि आँखों में एसोट्रोपिया यानि दूर की वस्तुओं पर ध्यान केन्द्रित करते समय आँखों का मुड़ जाना तो इस अवस्था में डॉक्टर चश्मा या लेंस का सुझाव देते हैं। लेकिन यदि चश्मे या लेंस के बाद भी आँखों का मुड़ना ठीक नहीं होता तब सर्जरी की जाती है।

सर्जरी- सर्जरी में लगभग 1 घंटे का समय लगता है जिसमें आँखों की गतिविधियों को नियंत्रित करने कोशिश की जाती है। इस सर्जरी के बाद आँखों को ठीक होने में कम से कम 6 से 8 हफ्तें लग जाते हैं। कई बार सर्जरी के तुरंत बाद डबल दिख सकता है और इस सर्जरी के बाद बच्चे की आँखों का चश्मा नही हटता है।

दवाई- किसी-किसी केस डॉक्टर सर्जरी के बाद कुछ दवाईयों के सेवन के लिए परामर्श देते हैं।